सिंहस्थ 2028 से पहले बदलेगी उज्जैन की तस्वीर, 13,851 करोड़ की 128 परियोजनाओं पर काम

मध्य प्रदेश के उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए शहर और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। सरकार ने अलग-अलग 10 विभागों से जुड़ी 128 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं पर कुल करीब 13,851 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
इन परियोजनाओं में सड़क और पुल निर्माण से लेकर फ्लाईओवर, घाट, पेयजल, सीवरेज, यातायात व्यवस्था और आधुनिक निगरानी तंत्र से जुड़े काम शामिल हैं। इनका उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उज्जैन की कनेक्टिविटी को लंबे समय के लिए मजबूत करना है।
सड़क और कनेक्टिविटी को मिल रही प्राथमिकता
सिंहस्थ के दौरान उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रहने की संभावना है। इसे देखते हुए शहर को आसपास के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाली सड़कों को अपग्रेड किया जा रहा है।
उज्जैन-इंदौर छह लेन परियोजना पर करीब 1,692 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसके अलावा लगभग 2,935 करोड़ रुपये की लागत से इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है।
उज्जैन-जावरा के बीच करीब 98.73 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरिडोर भी तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 5,017 करोड़ रुपये है। इसमें सात फ्लाईओवर, तीन रेलवे ओवरब्रिज, आठ बड़े पुल, 22 छोटे पुल और अंडरपास बनाए जाने की योजना है। इस कॉरिडोर का निर्माण दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
शहर के भीतर यातायात को सुचारु बनाने के लिए भी कई परियोजनाएं चल रही हैं। हरिफाटक इलाके में 629 मीटर लंबा अंडरपास प्रस्तावित है। इसके अलावा इंद्रानगर-नीलगंगा और इंदौर गेट-निकास चौराहा क्षेत्र में करीब 945 करोड़ रुपये की लागत से 5.30 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जा रहा है।
क्षिप्रा के किनारे विकसित होंगे नए घाट
सिंहस्थ में क्षिप्रा नदी का विशेष महत्व है। लाखों श्रद्धालु यहां स्नान के लिए पहुंचते हैं। इसे देखते हुए नदी के करीब 29.2 किलोमीटर क्षेत्र में नए घाट और उनसे जुड़ी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इस काम पर लगभग 778 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
क्षिप्रा को प्रदूषण से बचाने के लिए कान्ह क्लोज्ड-डक्ट डायवर्जन परियोजना पर भी काम किया जा रहा है। करीब 919.94 करोड़ रुपये की इस योजना के तहत 30 किलोमीटर से अधिक लंबी डायवर्जन प्रणाली तैयार की जानी है।
इस परियोजना का उद्देश्य कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को क्षिप्रा में मिलने से रोकना है, जिससे सिंहस्थ के दौरान नदी की स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिल सके।
AI और ड्रोन से होगी मेले की निगरानी
सिंहस्थ की तैयारियों में आधुनिक तकनीक को भी शामिल किया जा रहा है। भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए करीब 139.14 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर विकसित करने की योजना है।
इस सेंटर से CCTV कैमरों, ड्रोन और डेटा एनालिटिक्स के जरिए मेले की गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखी जा सकेगी। AI आधारित सिस्टम से भीड़ की स्थिति पर निगरानी रखने के साथ पार्किंग और रूट संबंधी जानकारी देने वाले मोबाइल एप की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
इसके अलावा साइबर सुरक्षा, सफाई व्यवस्था और जल आपूर्ति जैसी सेवाओं की निगरानी भी इसी आधुनिक सिस्टम के जरिए किए जाने की योजना है।
2027 की दीपावली तक पूरा करने का लक्ष्य
सरकार सिंहस्थ से जुड़े निर्माण कार्यों को आयोजन से पहले पूरा करने पर जोर दे रही है। इसके लिए 2027 की दीपावली तक प्रस्तावित विकास परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
अप्रैल 2026 में हुई मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में करीब 2,923.84 करोड़ रुपये की लागत वाले 22 अतिरिक्त कार्यों को मंजूरी दी गई थी। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
40 करोड़ श्रद्धालुओं के हिसाब से तैयारी
सिंहस्थ 2028 के दौरान करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आगमन को देखते हुए सिर्फ उज्जैन ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
पार्किंग व्यवस्था, होम स्टे और सार्वजनिक सुविधाओं को विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सड़क, परिवहन, नदी घाट और डिजिटल निगरानी जैसी परियोजनाएं पूरी होने के बाद सिंहस्थ के दौरान व्यवस्थाओं को संभालने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सिंहस्थ 2028 के लिए चल रहे ये विकास कार्य उज्जैन में केवल मेले की तैयारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहर की कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं को लंबे समय के लिए मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
