टिकट कटने के बाद संजयन त्रिपाठी ने छोड़ी BJP, सपा का थामा हाथ; पुरानी पेंशन बहाली का किया वादा

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी से लगातार दूसरी बार टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन करने वाले डॉ. संजयन त्रिपाठी अब समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें सपा की सदस्यता दिलाने के साथ ही इस सीट से पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया है।

सपा में शामिल होने के बाद संजयन त्रिपाठी ने बीजेपी छोड़ने और सपा का साथ चुनने के पीछे की वजहों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहने के बावजूद उन्हें लगातार दूसरी बार टिकट नहीं मिला। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद पार्टी की ओर से उन्हें कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला, जिसके चलते उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया।

2010 और 2017 में भी लड़ चुके हैं चुनाव

डॉ. संजयन त्रिपाठी ने बताया कि वह काफी समय से भाजपा से जुड़े हुए थे। उन्होंने वर्ष 2010 और 2017 में गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था और दोनों बार दूसरे स्थान पर रहे।

2023 में भी उन्होंने भाजपा से टिकट के लिए आवेदन किया था, लेकिन पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। इसके बावजूद उन्होंने संगठन के साथ काम करना जारी रखा। उनका दावा है कि 2026 के शिक्षक एमएलसी चुनाव की तैयारियां भी उन्होंने पार्टी के कहने पर शुरू की थीं।

इस बार भी टिकट नहीं मिलने के बाद उन्हें निराशा हुई। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व की तरफ से उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया।

निर्दलीय नामांकन के बाद सपा ने किया संपर्क

संजयन त्रिपाठी के मुताबिक, निर्दलीय नामांकन दाखिल करने के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से उनसे संपर्क किया गया। पार्टी की ओर से मिले प्रस्ताव पर उन्होंने सहमति जताई और सपा में शामिल होने का फैसला किया।

लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद शनिवार को उनके पार्टी में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की गई। इसके साथ ही उन्हें गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से सपा का उम्मीदवार भी घोषित कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि लगातार टिकट कटने से स्वाभाविक रूप से निराशा होती है। अगर समय रहते पार्टी की ओर से बातचीत या समाधान का कोई रास्ता सामने आता तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं।

कमलेश यादव के त्याग की तारीफ

सपा ने पहले इस सीट से कमलेश यादव को अपना प्रत्याशी बनाया था। बाद में पार्टी ने उनका टिकट बदलकर संजयन त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया।

इस घटनाक्रम पर संजयन त्रिपाठी ने कमलेश यादव की तारीफ की। उन्होंने कहा कि कमलेश यादव से उनके अच्छे संबंध हैं और पार्टी के हित में उन्होंने जिस तरह अपनी उम्मीदवारी छोड़ी, वह सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि अब दोनों मिलकर सपा के पक्ष में चुनावी माहौल बनाने और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी को जीत दिलाने के लिए काम करेंगे।

‘जो होना था, वही हुआ’

भाजपा छोड़कर सपा में जाने के फैसले को लेकर संजयन त्रिपाठी ने कहा कि कई घटनाएं व्यक्ति के नियंत्रण से बाहर होती हैं। उन्होंने अपने फैसले को नियति से जोड़ते हुए कहा कि इंसान केवल एक माध्यम होता है और परिस्थितियां अपना रास्ता खुद बनाती हैं।

उनका कहना है कि भाजपा छोड़कर सपा में जाना भी शायद पहले से तय था और परिस्थितियां उसी दिशा में आगे बढ़ती चली गईं।

अखिलेश यादव के सामने रखीं शिक्षकों की दो बड़ी मांगें

सपा में शामिल होने के दौरान डॉ. संजयन त्रिपाठी ने अखिलेश यादव के सामने शिक्षकों से संबंधित दो महत्वपूर्ण मुद्दे रखे। इनमें पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली और वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के मानदेय में बढ़ोतरी शामिल है।

संजयन त्रिपाठी के मुताबिक, उन्होंने पार्टी अध्यक्ष से कहा कि यदि इन मांगों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाता है तो शिक्षक समुदाय के बीच इसका सकारात्मक संदेश जाएगा।

उनका दावा है कि अखिलेश यादव ने दोनों मांगों पर सहमति जताते हुए कहा कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर इन मुद्दों पर फैसला लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री से भी की पुरानी पेंशन बहाली की मांग

संजयन त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री से भी अपील की है कि भाजपा प्रत्याशी के नामांकन के दौरान ही पुरानी पेंशन बहाली और वित्तविहीन शिक्षकों के लिए सम्मानजनक मानदेय की घोषणा की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार ऐसा करती है तो वह इस फैसले का स्वागत करेंगे। यहां तक कि उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में वह शिक्षक मतदाताओं से भाजपा प्रत्याशी के समर्थन की अपील करने को भी तैयार हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वह मुख्यमंत्री के साथ खड़े होकर शिक्षकों के हित में लिए गए ऐसे फैसले का समर्थन करेंगे।

शिक्षक एमएलसी चुनाव में बढ़ा सियासी मुकाबला

डॉ. संजयन त्रिपाठी के सपा में शामिल होने के बाद शिक्षक एमएलसी चुनाव का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। उन्होंने कहा कि इस बार का चुनाव पिछले चुनावों की तुलना में अधिक राजनीतिक नजर आ रहा है और कई प्रमुख राजनीतिक दल इसमें सक्रिय हैं।

हालांकि, उन्होंने इसे सीधे तौर पर भाजपा बनाम सपा की लड़ाई मानने से इनकार किया। उनका कहना है कि असली मुद्दा शिक्षकों की समस्याएं हैं और चुनाव में इन्हीं मुद्दों पर मतदाताओं का रुख महत्वपूर्ण होगा।

शिक्षकों की अनदेखी का लगाया आरोप

संजयन त्रिपाठी ने भाजपा पर शिक्षकों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने पुरानी पेंशन व्यवस्था खत्म होने, कुछ कर्मचारी सुविधाओं में बदलाव और शिक्षकों से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि जब शिक्षकों की समस्याओं को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है, तो चुनाव के समय उन्हीं शिक्षकों से समर्थन मांगने का आधार भी स्पष्ट होना चाहिए।

उन्होंने प्राथमिक विद्यालयों से जुड़े फैसलों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इनका प्रभाव शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था दोनों पर पड़ा है।

दोबारा नामांकन दाखिल करेंगे संजयन

सपा का अधिकृत उम्मीदवार घोषित होने के बाद डॉ. संजयन त्रिपाठी अब पार्टी प्रत्याशी के तौर पर दोबारा नामांकन दाखिल करेंगे। उनके सपा में शामिल होने के दौरान पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी भी मौजूद रहे।

भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद संजयन त्रिपाठी ने निर्दलीय नामांकन दाखिल किया था। इसके बाद उनके सपा में जाने की चर्चा तेज हुई और अंततः पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बना दिया।

अब कमलेश यादव की जगह संजयन त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाए जाने और भाजपा की ओर से मौजूदा एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी को टिकट मिलने के बाद गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबला नए राजनीतिक समीकरणों के साथ सामने है।

टिकट कटने के बाद गाड़ी से उतारा भाजपा का झंडा

संजयन त्रिपाठी के भाजपा से अलग होने की तस्वीर उस समय सामने आई जब निर्दलीय नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने अपनी कार से भाजपा का झंडा हटा दिया।

बताया जाता है कि वह भाजपा से टिकट मिलने को लेकर आश्वस्त थे, लेकिन पार्टी ने मौजूदा एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया और नामांकन दाखिल किया।

नामांकन के बाद सपा नेताओं के साथ उनकी बातचीत आगे बढ़ी। पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी उन्हें लेकर लखनऊ पहुंचे, जहां उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात हुई। इसके बाद सपा में शामिल होने और उन्हें पार्टी प्रत्याशी बनाए जाने का रास्ता साफ हुआ।

अब देखना होगा कि शिक्षक मतदाता इस नए राजनीतिक समीकरण पर कितना भरोसा जताते हैं और आगामी चुनाव में इसका असर किस उम्मीदवार के पक्ष में दिखाई देता है।

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