जेल से 17 विचाराधीन कैदियों के भागने पर तमिलनाडु में मचा बवाल, 13 की गिरफ्तारी के बाद भी चार की तलाश जारी

तमिलनाडु के थेनी जिले में स्थित थेक्कमपट्टी सब-जेल से 17 विचाराधीन कैदियों के फरार होने का मामला सामने आया है। सोमवार, 26 अक्टूबर की देर रात हुई इस घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू किया। पुलिस ने ड्रोन और विशेष टीमों की मदद से 14 घंटे के भीतर 13 फरार कैदियों को पकड़ लिया, जबकि चार अन्य की तलाश जारी है।
घटना के सामने आने के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था और राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम. के. स्टालिन ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री विजय की सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने जेल से एक साथ बड़ी संख्या में कैदियों के भागने को प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
ड्रोन की मदद से चलाया गया तलाशी अभियान
जेल से कैदियों के फरार होने की जानकारी मिलते ही पुलिस ने उनकी तलाश के लिए विशेष टीमें गठित कीं। संभावित रास्तों पर वाहनों की जांच की गई और आसपास के इलाकों में सघन तलाशी अभियान चलाया गया। फरार कैदियों को पकड़ने के लिए आर्म्ड रिजर्व फोर्स, तमिलनाडु स्पेशल पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स के जवानों को भी लगाया गया।
पुलिस ने तलाश अभियान में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आसपास के क्षेत्रों पर नजर रखी। अलग-अलग स्थानों पर तलाशी और निगरानी के बाद 17 में से 13 कैदियों को पकड़ने में सफलता मिली। बाकी चार कैदियों का पता लगाने के लिए पुलिस की कार्रवाई जारी है।
इस घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी के तरीकों और कैदियों के फरार होने की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, कैदी किस तरह जेल से बाहर निकले और इस घटना में सुरक्षा संबंधी कोई चूक हुई या नहीं, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय पर साधा निशाना
कैदियों के फरार होने की घटना को लेकर एम. के. स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए राज्य की मौजूदा सरकार की आलोचना की। उन्होंने पॉप-कल्चर के चर्चित संदर्भ ‘ब्रेकिंग बैड’ का इस्तेमाल करते हुए कहा कि तमिलनाडु में अब ‘जेल ब्रेक’ का दौर शुरू हो गया है।
स्टालिन ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि प्रशासन उन लोगों की निगरानी करने में भी विफल दिखाई दे रहा है, जिन्हें जमानत पर रिहा किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जेल के भीतर बंद कैदी भी फरार हो रहे हैं, तो राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा कैसे किया जा सकता है।
डीएमके प्रमुख की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब थेनी जिले की जेल से एक साथ 17 विचाराधीन कैदियों के फरार होने का मामला चर्चा में है। स्टालिन ने इस घटना को सरकार की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर दिया।
‘1995 के बाद पहली बार ऐसी घटना’, स्टालिन का दावा
स्टालिन ने अपनी प्रतिक्रिया में दावा किया कि वर्ष 1995 के बाद यह पहली बार है, जब इतनी बड़ी संख्या में कैदी एक साथ फरार हुए हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों और निगरानी तकनीक के दौर में इस तरह की घटना को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बाहर मौजूद अपराधियों और जेल के भीतर बंद कैदियों से जुड़े मामलों में भी सरकार को प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए। उनके मुताबिक, इस घटना से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
स्टालिन ने अपने बयान में सरकार की आलोचना करते हुए प्रशासन को ‘गुड फॉर नथिंग’ भी कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और आम नागरिकों को अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता करनी पड़ रही है।
चार फरार कैदियों की तलाश जारी
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती फरार चार विचाराधीन कैदियों को पकड़ना है। इसके लिए तलाशी अभियान और निगरानी जारी रखी गई है। पुलिस की विशेष टीमें संभावित ठिकानों और आवाजाही के रास्तों पर नजर रख रही हैं।
इस मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कैदी जेल से फरार होने में कैसे सफल हुए और सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं। साथ ही, घटना के बाद जेल प्रशासन की जिम्मेदारी और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा भी महत्वपूर्ण होगी।
जेल से कैदियों के फरार होने की घटना ने तमिलनाडु में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। जहां पुलिस फरार कैदियों को पकड़ने में जुटी है, वहीं विपक्ष इस घटना के जरिए सरकार से जवाब मांग रहा है।
