कन्नौज में इजरायली तकनीक से तैयार हो रही 3.50 लाख सब्जियों की पौध, किसानों को मिलेगा बढ़िया उत्पादन का लाभ

कन्नौज: जिले के उमर्दा क्षेत्र में स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल में इन दिनों बड़े स्तर पर सब्जियों की पौध तैयार की जा रही है। सेंटर में करीब 3.50 लाख पौध तैयार अवस्था में हैं। खास बात यह है कि किसानों द्वारा उपलब्ध कराए गए बीजों से आधुनिक और इजरायली तकनीक के आधार पर पौध तैयार की जा रही है।

सेंटर से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, नियंत्रित वातावरण और वैज्ञानिक तरीके से तैयार की गई पौध खेत में लगाने के बाद बेहतर विकास और उत्पादन में मदद कर सकती है। आसपास के कई जिलों के किसान इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।

शिमला मिर्च, टमाटर और गोभी समेत कई सब्जियों की पौध

सेंटर में अलग-अलग किस्म की सब्जियों की पौध तैयार की जा रही है। इनमें कलर्ड शिमला मिर्च, अचार वाली मिर्च, टमाटर, गोभी, बैंगन, लौकी और सहजन सहित कई फसलें शामिल हैं।

औरैया, कानपुर देहात, इटावा, हरदोई और फर्रुखाबाद समेत आसपास के क्षेत्रों के करीब 45 किसानों ने अपनी फसल के लिए पौध तैयार कराने के उद्देश्य से सेंटर में बीज उपलब्ध कराए हैं।

एक बैच की पौध तैयार होने में लगभग 30 से 35 दिन का समय लगता है। इस दौरान पॉलीहाउस के अंदर तापमान को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी होता है। पौध के अनुकूल वातावरण बनाए रखने के लिए तापमान करीब 28 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाता है।

पॉलीहाउस में तापमान नियंत्रित करने की व्यवस्था

सेंटर में पौध को नियंत्रित वातावरण में विकसित किया जाता है। पॉलीहाउस के एक हिस्से में बड़े एग्जॉस्ट फैन लगाए गए हैं, जबकि दूसरी ओर कूलिंग पैड की व्यवस्था है। इन दोनों की मदद से अंदर का तापमान आवश्यक स्तर पर बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।

इस तरह नियंत्रित तापमान में पौध को शुरुआती अवस्था में बेहतर वातावरण मिलता है और मौसम में अचानक होने वाले बदलावों का असर भी कम किया जा सकता है।

किसान अपने बीज देकर भी तैयार करा सकते हैं पौध

सेंटर के इंचार्ज प्रवीण पटेल के मुताबिक, किसानों को अपनी पसंद की किस्म के बीज उपलब्ध कराकर पौध तैयार कराने की सुविधा दी जाती है। इसके साथ ही सेंटर की तरफ से उन्नत किस्मों की पौध भी तैयार की जाती है।

अगर किसान अपना बीज देकर पौध तैयार करवाते हैं, तो इसके लिए एक पौधे के हिसाब से एक रुपये शुल्क निर्धारित है। वहीं, सेंटर की ओर से तैयार सामान्य सब्जियों की पौध लेने पर दो रुपये प्रति पौधा भुगतान करना होता है। शिमला मिर्च की पौध के लिए तीन रुपये प्रति पौधा शुल्क लिया जाता है।

फंगस और बीमारी से बचाव के लिए खास इंतजाम

पौध तैयार करने के दौरान सबसे बड़ी चुनौतियों में फंगस और दूसरे रोगों से बचाव शामिल है। इसके लिए सेंटर में पौध को सीधे जमीन पर रखने के बजाय लोहे की टेबल पर प्लास्टिक ट्रे में तैयार किया जाता है।

इस व्यवस्था से पौध का मिट्टी से सीधा संपर्क नहीं होता, जिससे संक्रमण की संभावना कम करने में मदद मिलती है। पौध की सिंचाई और आवश्यक दवाओं के छिड़काव के लिए भी लोहे के पाइप के जरिए विशेष व्यवस्था की गई है।

करीब 90 प्रतिशत तक पौध बेहतर स्थिति में तैयार होने का दावा

सेंटर के अनुसार, वैज्ञानिक तरीके और नियंत्रित वातावरण में पौध तैयार करने से लगभग 90 प्रतिशत तक पौध बेहतर स्थिति में तैयार हो जाती है। स्वस्थ और मजबूत पौध मिलने से किसानों को खेत में रोपाई के बाद फसल की शुरुआत बेहतर तरीके से करने में मदद मिल सकती है।

आधुनिक तकनीक से पौध तैयार करने की यह व्यवस्था आसपास के किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। इससे किसानों को अपनी जरूरत के मुताबिक पौध तैयार कराने का विकल्प मिल रहा है और सब्जी उत्पादन को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ावा देने में भी मदद मिल रही है।

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