अर्नब-मुरासु के बाद नए चक्रवातों की आशंका, भारत में सर्दियों के तापमान पर कितना पड़ेगा प्रभाव?

देश के पूर्वी और दक्षिणी तटीय इलाकों में हाल के दिनों में आए चक्रवाती तूफानों ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में आए चक्रवात अर्नब और नवंबर की शुरुआत में सक्रिय हुए मुरासु के कारण कई राज्यों में तेज बारिश और हवाओं का असर देखने को मिला। हालांकि, अब मुरासु की ताकत धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन इसके प्रभाव से कुछ इलाकों में मौसम में बदलाव बना हुआ है।
लगातार दो चक्रवाती सिस्टम सामने आने के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या साल 2026 के खत्म होने से पहले देश को और तूफानों का सामना करना पड़ सकता है? इसके अलावा, क्या इन चक्रवातों की वजह से इस बार सर्दियों में ठंड ज्यादा पड़ेगी या फिर ठंड का असर कम रहेगा?
अर्नब और मुरासु के बाद कितने तूफानों की संभावना?
साल 2026 के चक्रवाती मौसम में अब तक दो सिस्टम चर्चा में रहे हैं। इनमें अक्टूबर के आखिरी दिनों में सक्रिय हुआ अर्नब और नवंबर की शुरुआत में प्रभाव दिखाने वाला मुरासु शामिल है। दोनों के कारण देश के कई हिस्सों में मौसम प्रभावित हुआ।
चक्रवातों के नाम तय करने के लिए एक सूची तैयार की जाती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सूची में शामिल सभी नामों वाले तूफान हर साल आएंगे। किसी मौसम संबंधी सिस्टम को चक्रवाती तूफान का दर्जा मिलने के बाद ही उसे सूची के अनुसार नाम दिया जाता है। इसके लिए हवा की अधिकतम निरंतर गति कम से कम 62 किलोमीटर प्रति घंटा होनी जरूरी होती है।
मुरासु के बाद प्रस्तावित नामों में अकवान, कानी और नगामान जैसे नाम शामिल हैं। ये नाम अलग-अलग देशों की ओर से सुझाए गए हैं। हालांकि, इन नामों का इस्तेमाल तभी होगा, जब संबंधित मौसम प्रणाली चक्रवाती तूफान का रूप लेगी।
दिसंबर तक कितने और चक्रवात आ सकते हैं?
भारत में अक्टूबर से दिसंबर के बीच चक्रवाती गतिविधियां आमतौर पर अधिक देखने को मिलती हैं। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में इस दौरान कम दबाव के क्षेत्र विकसित होने की संभावना रहती है। इनमें से कुछ सिस्टम आगे चलकर गहरे दबाव या चक्रवाती तूफान में बदल सकते हैं।
मौसम की गतिविधियों पर समुद्र की सतह का तापमान, हवा की दिशा, वायुमंडलीय परिस्थितियां और अल नीनो जैसी जलवायु संबंधी घटनाओं का प्रभाव पड़ता है।
इस साल अल नीनो की परिस्थितियों को भी चक्रवाती गतिविधियों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है। हालांकि, केवल अल नीनो के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि आगे कितने तूफान आएंगे या उनकी तीव्रता कितनी होगी।
नवंबर और दिसंबर के दौरान एक या दो नए मौसम सिस्टम विकसित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन हर सिस्टम का चक्रवात में बदलना जरूरी नहीं है। कुछ सिस्टम कम दबाव या गहरे दबाव तक ही सीमित रह सकते हैं।
इसलिए फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि साल के आखिरी महीनों में कोई बड़ा चक्रवाती तूफान भारत के तटों से टकराएगा या नहीं।
क्या चक्रवातों से सर्दियों में बढ़ेगी ठंड?
चक्रवाती तूफानों का असर केवल बारिश और तेज हवाओं तक सीमित नहीं रहता। ये वायुमंडल में नमी, हवा की दिशा और तापमान के पैटर्न को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से कुछ क्षेत्रों में सर्दियों की शुरुआत में देरी हो सकती है, जबकि कहीं बारिश के बाद तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है।
मुरासु के प्रभाव के कारण पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में तापमान सामान्य से ऊपर बने रहने की स्थिति सामने आई है। कोलकाता समेत राज्य के कई हिस्सों में मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। हालांकि, बारिश और बादलों का असर कम होने के बाद तापमान में गिरावट आने की संभावना रहती है।
नवंबर के शुरुआती दिनों में मौसम साफ होने के साथ सुबह और रात के समय ठंड का एहसास बढ़ सकता है। ऐसे में पश्चिम बंगाल के लोगों को आने वाले दिनों में तापमान में बदलाव देखने को मिल सकता है।
दिल्ली-NCR और उत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम?
दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और आसपास के राज्यों में मुरासु का सीधा प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। इन इलाकों में मौसम का रुख मुख्य रूप से स्थानीय मौसमी परिस्थितियों और उत्तर-पश्चिमी हवाओं पर निर्भर करेगा।
उत्तर भारत में नवंबर के दौरान सुबह और रात के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आना सामान्य मौसमी प्रक्रिया है। दिन में धूप रहने के बावजूद सुबह-शाम ठंड महसूस हो सकती है।
फिलहाल चक्रवात मुरासु के कारण उत्तर भारत में व्यापक स्तर पर ठंड बढ़ने का कोई स्पष्ट संकेत नहीं है। हालांकि, आने वाले दिनों में हवा की दिशा और पश्चिमी विक्षोभ जैसी मौसमी गतिविधियां तापमान को प्रभावित कर सकती हैं।
अर्नब और मुरासु से किन राज्यों में पड़ा असर?
अर्नब का प्रभाव: अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में सक्रिय हुए चक्रवात अर्नब के कारण आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। इसके बाद कुछ अन्य राज्यों में भी मौसम में बदलाव दर्ज किया गया। दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में बारिश तथा तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
मुरासु का प्रभाव: नवंबर की शुरुआत में सक्रिय हुए मुरासु के कारण आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में तेज बारिश और हवाओं का असर रहा। इसके अलावा तमिलनाडु, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में भी बारिश की गतिविधियां देखने को मिलीं।
इन राज्यों में बारिश के बाद बढ़ सकती है ठंड
चक्रवाती सिस्टम के गुजरने के बाद जिन इलाकों में बारिश होती है, वहां बादलों के हटने और हवाओं के बदलने से तापमान में गिरावट आ सकती है। आंध्र प्रदेश के तटीय इलाके, ओडिशा के दक्षिणी जिले और तमिलनाडु के उत्तरी हिस्सों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भी बारिश के बाद तापमान नीचे जा सकता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि इस बदलाव के कारण लंबे समय तक कड़ाके की ठंड बनी रहे। मौसम प्रणाली का प्रभाव समाप्त होने के बाद परिस्थितियां धीरे-धीरे सामान्य हो सकती हैं।
कम चक्रवात आने का मतलब खतरा कम होना नहीं
इस साल अब तक चक्रवाती गतिविधियों की संख्या सीमित रहने के बावजूद तटीय राज्यों के लिए सतर्कता जरूरी है। किसी मौसम प्रणाली का कम समय तक सक्रिय रहना या कम संख्या में तूफान बनना इस बात की गारंटी नहीं है कि खतरा भी कम होगा।
कभी-कभी कम समय में विकसित होने वाला सिस्टम भी तेज हवाओं, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों का कारण बन सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों, मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों पर पड़ता है।
कुल मिलाकर, नवंबर और दिसंबर के दौरान देश के समुद्री इलाकों में चक्रवाती गतिविधियों की संभावना बनी रह सकती है। वहीं, उत्तर भारत में सर्दी का असर धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है। इस बार ठंड कितनी तेज होगी, इसका आकलन आने वाले दिनों के तापमान और मौसमी परिस्थितियों के आधार पर ही बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।
