अब्दुल अजीज मियां के उर्स में दिखी आस्था की झलक, चादर जुलूस और लंगर में शामिल हुए हजारों जायरीन

बरेली: नवादा इमामावाद में स्थित हजरत अब्दुल अजीज मियां की दरगाह पर आयोजित तीन दिवसीय सालाना उर्स धार्मिक माहौल और अकीदत के साथ संपन्न हो गया। उर्स के अंतिम दिन बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंद दरगाह पहुंचे। लोगों ने चादरपोशी और गुलपोशी कर अपनी मन्नतों के लिए दुआ की।

उर्स के तहत बुधवार शाम दरगाह परिसर में कव्वाली का आयोजन किया गया। कव्वाली के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की और देर रात तक धार्मिक माहौल बना रहा।

कुरान ख्वानी के बाद निकाला गया चादरों का जुलूस

गुरुवार सुबह नमाज-ए-फजर के बाद दरगाह पर कुरान ख्वानी का आयोजन किया गया। इसके बाद अकीदतमंदों की ओर से चादरों का जुलूस निकाला गया। जुलूस के दौरान लोग दरगाह पर चादर लेकर पहुंचे और मजार पर चादरपोशी की।

दरगाह पर पहुंचे जायरीनों ने गुलपोशी कर अपनी मन्नतों और दुआओं के लिए प्रार्थना की। इस दौरान दरगाह परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही।

कुल शरीफ में देश की खुशहाली के लिए हुई दुआ

दोपहर करीब 1 बजे कुल शरीफ की रस्म शुरू हुई। इस दौरान नात और मनकबत पेश की गईं। उलेमाओं ने तकरीर के जरिए लोगों को धार्मिक संदेश भी दिया।

कुल शरीफ के समापन पर विशेष दुआ कराई गई। इसमें देश में अमन-चैन, खुशहाली और तरक्की के साथ लोगों की सलामती की दुआ मांगी गई। दुआ के दौरान मौजूद लोगों ने हाथ उठाकर आमीन कहा।

लंगर में बड़ी संख्या में लोगों ने की शिरकत

कुल शरीफ के बाद लंगर का आयोजन किया गया। इसमें आसपास के क्षेत्रों से आए जायरीनों और अकीदतमंदों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भी हिस्सा लिया। आयोजकों के अनुसार, लंगर में हजारों लोगों ने भोजन ग्रहण किया।

उर्स के दौरान व्यवस्था बनाए रखने में आयोजन समिति और स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में मेला अध्यक्ष मोहम्मद हसन, अतीक अहमद इदरीसी, मुन्ने बख्श, नूर हसन, कय्यूम शाह, बेच शाह, फरियाद अहमद, मो. असलम, मो. आजम, मो. आशिक, प्रधान कुलदीप गंगवार, मो. आमिल, मुशर्रफ अली, अनीस अहमद, मो. अहमद, समसुल हसन, मो. अफजल और बाबू अंसारी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

तीन दिनों तक चले उर्स के दौरान दरगाह पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ जायरीनों की आवाजाही बनी रही। अंतिम दिन कुल शरीफ, दुआ और लंगर के साथ उर्स का समापन किया गया।

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