Himanta Biswa Sarma सरकार के UCC बिल पर विवाद तेज, Asaduddin Owaisi बोले- यह समान कानून नहीं

Assam की सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक विधानसभा में पेश किए जाने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की सरकार का कहना है कि यह कानून राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों में समानता लाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

हालांकि इस विधेयक को लेकर Asaduddin Owaisi ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। AIMIM प्रमुख ने आरोप लगाया कि यह कानून वास्तव में “समान” नहीं है, क्योंकि इसमें अनुसूचित जनजातियों (ST) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

ओवैसी ने क्या कहा?

ओवैसी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि संविधान सभी समुदायों को अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा का अधिकार देता है, तो फिर केवल आदिवासी समुदायों को ही अलग छूट क्यों दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि यह कानून सभी पर समान रूप से लागू नहीं हो रहा और इसे जबरन लागू करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने इस्लामी विरासत कानून का जिक्र करते हुए कहा कि इस्लाम में किसी वारिस को उसकी हिस्सेदारी से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक प्रस्तावित UCC के तहत कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति की वसीयत इस तरह कर सकता है कि बेटियों को हिस्सा न मिले, जो उनके अनुसार लैंगिक न्याय की भावना के खिलाफ है।

बिल में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?

प्रस्तावित UCC बिल में राज्य के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और संपत्ति से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी ढांचा लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि अनुसूचित जनजातियों को उनके संवैधानिक अधिकारों और पारंपरिक व्यवस्थाओं की सुरक्षा के लिए इससे बाहर रखा गया है।

बिल में एक विवाह व्यवस्था को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। इसके तहत पुरुषों की न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है। साथ ही राज्य में सभी शादियों और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि यह कानून धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को पूरी तरह समाप्त नहीं करेगा। विभिन्न समुदाय अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह समारोह कर सकेंगे, जिनमें निकाह, सप्तपदी, आनंद कारज और अन्य पारंपरिक पद्धतियां शामिल हैं।

राजनीतिक बहस और आगे की राह

All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen समेत कई विपक्षी दल इस बिल को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सरकार इसे सामाजिक समानता और कानूनी एकरूपता की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विधानसभा के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

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