मेरठ में बारिश से किसानों को दोहरी मार, खेतों में जलभराव से गन्ने की पेराई और सरसों की बुवाई प्रभावित

मेरठ में लगातार दो दिनों तक हुई बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब 48 घंटे तक रुक-रुककर हुई बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम ठंडा होने के साथ वायु गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है, लेकिन खेतों में पानी भरने से खेती-किसानी से जुड़े काम प्रभावित हो गए हैं। सबसे ज्यादा असर गन्ने की खरीद और पेराई के साथ सरसों की अगेती बुवाई पर पड़ा है। ग्रामीण इलाकों में गन्ने का सीजन शुरू होते ही क्रेशरों का संचालन बंद हो गया है।

दरअसल, चीनी मिलों का संचालन शुरू होने से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में गन्ना क्रेशरों के माध्यम से किसानों की उपज खरीदी और उसकी पेराई की जाती है। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान अपना गन्ना क्रेशरों पर बेचते हैं। लेकिन पिछले दो दिनों की बारिश के कारण क्रेशर परिसरों में पानी भर गया है। जलभराव की वजह से गन्ने की खरीद और पेराई का काम पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

क्रेशर संचालकों के सामने भी अब आर्थिक और परिचालन संबंधी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उनका कहना है कि उन्होंने किसानों से नकद भुगतान करके गन्ने की खरीद की थी, लेकिन बारिश के बाद परिसर में पानी भर जाने से मशीनों का संचालन संभव नहीं रह गया है। ऐसे में क्रेशरों को बंद करना पड़ा है। मौजूदा हालात को देखते हुए अगले करीब 10 दिनों तक कामकाज शुरू होने में परेशानी आने की आशंका जताई जा रही है।

गन्ने की पेराई रुकने से किसानों की बढ़ी परेशानी

गन्ने का सीजन शुरू होने के शुरुआती दौर में ही क्रेशरों का बंद होना किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। जिन किसानों को अपनी उपज बेचनी थी, उन्हें अब इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, क्रेशर संचालकों के सामने खरीदे गए गन्ने की पेराई और आगे की खरीद को लेकर भी संकट पैदा हो गया है।

बारिश के कारण क्रेशर परिसरों में जमा पानी निकलने और जमीन सूखने तक कामकाज सामान्य होना मुश्किल है। इसका असर ग्रामीण क्षेत्र में गन्ने की खरीद-बिक्री की व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

सरसों की अगेती बुवाई में हो सकती है देरी

बारिश से किसानों की परेशानी सिर्फ गन्ने तक सीमित नहीं है। खेतों में पानी भरने और मिट्टी में अधिक नमी होने के कारण सरसों की अगेती बुवाई का काम भी प्रभावित हुआ है। जिन किसानों ने सरसों की बुवाई की तैयारी कर रखी थी, उन्हें अब मौसम सामान्य होने का इंतजार करना पड़ रहा है।

किसानों के मुताबिक, खेतों में जलभराव और अधिक नमी के चलते अगले कई दिनों तक कृषि कार्य करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में सरसों की बुवाई निर्धारित समय से आगे खिसकने की आशंका है। यदि बुवाई में ज्यादा देरी होती है तो इसका असर फसल की बढ़वार और संभावित पैदावार पर भी पड़ सकता है।

खेतों में कटी पड़ी धान की फसल भी हुई प्रभावित

लगातार बारिश ने धान की कटाई और फसल को सुरक्षित रखने की व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। कुछ किसानों की धान की फसल कटने के बाद खेतों में ही पड़ी हुई थी। बारिश का पानी लगने से इस फसल को नुकसान पहुंचा है। किसानों के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ उन्हें पहले से कटी धान की फसल को हुए नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ अगली फसल की बुवाई भी समय पर नहीं हो पा रही है।

खेती के पूरे चक्र पर पड़ा बारिश का असर

मेरठ में दो दिनों तक हुई बारिश ने किसानों की कृषि गतिविधियों का पूरा कार्यक्रम प्रभावित कर दिया है। गन्ने की खरीद और पेराई रुकने, सरसों की बुवाई में देरी और धान की कटी फसल खराब होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों से पानी निकलने और जमीन के अनुकूल होने के बाद ही खेती के काम दोबारा गति पकड़ सकेंगे। फिलहाल किसानों को मौसम साफ होने और खेतों के सूखने का इंतजार है।

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