फर्जी अफसर बनकर नौकरी का झांसा देने का मामला, बरेली में दो नए मुकदमे; 43 तक पहुंची संख्या

बरेली में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने के आरोपों से घिरी विप्रा शर्मा के खिलाफ दो और मामले दर्ज किए गए हैं। आरोप है कि विप्रा ने खुद को कभी IAS, IPS तो कभी SDM और ADM बताकर नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अपने जाल में फंसाया। नए मामलों में भी नौकरी लगवाने का भरोसा देकर रकम लेने और बाद में न नौकरी दिलाने का आरोप लगाया गया है।
पुलिस के अनुसार, इस कथित फर्जी अफसर नेटवर्क के खिलाफ अब तक अलग-अलग थानों में 43 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
सेल्समैन को सरकारी नौकरी का भरोसा देकर रकम लेने का आरोप
प्रेमनगर क्षेत्र के जाटवपुरा निवासी सनी सिंह एक कपड़ों की दुकान में सेल्समैन के तौर पर काम करते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात विप्रा शर्मा से हुई। आरोप है कि विप्रा ने खुद को SDM बताते हुए सनी को सरकारी विभाग में क्लर्क या तृतीय श्रेणी कर्मचारी की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया।
इसके लिए करीब 8 लाख रुपये खर्च होने की बात कही गई। सनी ने अलग-अलग समय में करीब पौने दो लाख रुपये दे दिए। काफी समय बीतने के बाद भी नौकरी नहीं लगी। रकम वापस मांगने पर भी भुगतान नहीं किया गया। बाद में सनी को विप्रा के खिलाफ चल रहे ठगी के मामलों की जानकारी हुई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
तीन लोगों की नौकरी के नाम पर 6.5 लाख लेने का आरोप
दूसरे मामले में कालीबाड़ी निवासी सुनील यादव ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022-23 के दौरान विप्रा उनके संपर्क में आई थी। बातचीत के दौरान उसने खुद को SDM बताया और सरकारी नौकरी लगवाने का दावा किया।
आरोप है कि सुनील ने अपने भाई सुधीर यादव, जसवीर यादव और दोस्त अरुण की नौकरी लगवाने के लिए कुल 6.5 लाख रुपये दिए। इसके बाद उन्हें नियुक्ति से जुड़े पत्र भेजे गए। ज्वाइनिंग की तारीख नजदीक आने पर नया पत्र भेज दिया जाता था, जिससे काफी समय तक उन्हें नौकरी लगने की उम्मीद बनी रही।
बाद में सुनील को पूरे मामले पर संदेह हुआ। पैसे वापस मांगने पर अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग की बात कहकर उन्हें टालने का आरोप है। दबाव बढ़ने पर 2.25 लाख रुपये वापस किए गए, जबकि शेष रकम नहीं लौटाई गई। फर्जीवाड़े से जुड़ी खबरें सामने आने के बाद सुनील ने पुलिस से शिकायत की।
अप्रैल में पुलिस ने किया था नेटवर्क का खुलासा
पुलिस ने 28 अप्रैल को कथित फर्जी अफसर गिरोह का खुलासा करते हुए विप्रा शर्मा, उसकी बहन शिखा और ममेरी बहन दीक्षा पाठक को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक विप्रा लोगों के सामने खुद को IAS बताती थी और कई जगहों पर SDM या ADM के रूप में पहचान बताकर प्रभाव जमाती थी।
आरोप है कि गिरोह से जुड़े लोग नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को भरोसे में लेकर उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने का लालच देते थे। विप्रा के पिता वीरेंद्र शर्मा सहित कुछ अन्य आरोपियों के फरार होने की बात भी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार इस मामले से जुड़े मुकदमे बरेली के बारादरी, कोतवाली, सुभाषनगर, किला और इज्जतनगर थानों में दर्ज हैं और इनकी कुल संख्या अब 43 हो गई है।
