जवाब देने की तारीख बढ़ाने की मांग पर बागी TMC सांसद, महुआ मोइत्रा बोलीं- ‘सच्चाई सामने आ गई…’

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी से बगावत कर चुके 20 सांसदों पर तीखा हमला बोला है। इन सांसदों ने अपनी संसद सदस्यता खत्म करने की मांग से जुड़ी याचिकाओं के संबंध में लोकसभा सचिवालय की ओर से भेजे गए नोटिस का जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। महुआ मोइत्रा ने बुधवार, 2 सितंबर को इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि समय पर जवाब नहीं दे पाना इस बात का संकेत है कि संबंधित सांसदों के पास अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर कोई ठोस सफाई नहीं है।
महुआ मोइत्रा का आरोप है कि ये सभी सांसद टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर जीतकर संसद पहुंचे थे, लेकिन बाद में उन्होंने एनसीपीआई और बीजेपी के साथ गठजोड़ कर लिया। उनका कहना है कि अब इन सांसदों के सामने अपने राजनीतिक फैसले और पार्टी बदलने के कदम को लेकर जवाब देने की चुनौती है।
महुआ ने कहा कि बागी सांसदों के मौजूदा रवैये से उनकी राजनीतिक रणनीति लोगों के सामने आ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सांसदों ने जिस तरह पार्टी के साथ विश्वासघात किया, वह अब सार्वजनिक रूप से स्पष्ट हो चुका है।
तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा
महुआ मोइत्रा की यह प्रतिक्रिया टीएमसी के बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय के बयान के एक दिन बाद आई। सुदीप बंद्योपाध्याय ने मंगलवार को बताया था कि 20 बागी सांसदों ने लोकसभा सचिवालय से नोटिस का जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है।
ये नोटिस टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर उन याचिकाओं के बाद जारी किए गए हैं, जिनमें इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की गई है।
सात दिन के भीतर देना था जवाब
लोकसभा सचिवालय ने पिछले सप्ताह बागी सांसदों को नोटिस जारी कर उनसे सात दिनों के अंदर अपना पक्ष रखने को कहा था। महुआ मोइत्रा के मुताबिक, निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद सांसदों की ओर से जवाब नहीं दिया गया और अब उन्होंने अतिरिक्त दो से तीन सप्ताह का समय मांग लिया है।
महुआ ने कहा कि टीएमसी ने जून में ही लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर इन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। ऐसे में उनका सवाल है कि इतने समय के बाद भी संबंधित सांसद अपना जवाब तैयार क्यों नहीं कर पाए।
महुआ ने समय मांगने पर उठाया सवाल
टीएमसी सांसद ने बागी सांसदों के अतिरिक्त समय मांगने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय मिल चुका है, तो जवाब देने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि अगर उनके सामने इस तरह का नोटिस होता तो वह जवाब देने में इतना लंबा समय नहीं लेतीं। उन्होंने बागी सांसदों के रवैये को उनकी स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों से जोड़ते हुए कहा कि जवाब देने में देरी कई चीजों को स्पष्ट करती है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद बढ़ा मामला
बागी सांसदों को लोकसभा सचिवालय की ओर से नोटिस उस समय जारी किए गए, जब सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी। इस याचिका में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया गया है।
फिलहाल बागी सांसद अपने जवाब दाखिल करने से पहले कानूनी सलाह ले रहे हैं। उनके द्वारा अतिरिक्त समय मांगे जाने से यह मामला और लंबा खिंच सकता है। साथ ही, इन सांसदों की लोकसभा सदस्यता को लेकर चल रही कानूनी और राजनीतिक प्रक्रिया भी आगे जारी रहने की संभावना है।
