चांदी के रथ को लेकर मथुरा में बढ़ा विवाद, पुलिस जांच से गोस्वामी समाज नाराज

मथुरा। वृंदावन स्थित ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर की रथयात्रा में इस्तेमाल होने वाले चांदी के रथ को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस साल रथयात्रा के दौरान चांदी का रथ नहीं सजाए जाने के बाद इसके गायब होने की चर्चा सामने आई थी। मामले की शिकायत के बाद मंदिर प्रबंधन की हाई पावर कमेटी ने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है।
इसी जांच के तहत रविवार को पुलिस और प्रशासन की टीम सेवायत गोस्वामियों के घर पहुंची। अधिकारियों ने चांदी के रथ और उससे जुड़ी अन्य सामग्री के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया। हालांकि, शुरुआत में लिखित नोटिस नहीं होने के कारण गोस्वामी पक्ष ने सामग्री दिखाने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस टीम को वापस लौटना पड़ा। बाद में अधिकारियों की ओर से नोटिस जारी किया गया।
रथ और सिंहासन को लेकर उठे सवाल
बताया गया है कि बांके बिहारी मंदिर में रथयात्रा समेत विभिन्न धार्मिक आयोजनों के दौरान चांदी के रथ, सिंहासन और अन्य सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इन सामग्रियों को सेवायत अधिकारी ज्ञानेंद्र गोस्वामी और बृजेन्द्र किशोर गोस्वामी की ओर से धार्मिक आयोजनों में सजाया जाता था।
इस वर्ष हाई पावर कमेटी के गठन के बाद रथयात्रा में चांदी का रथ और सिंहासन नहीं सजाया गया। इसके बाद इस सामग्री की स्थिति और स्वामित्व को लेकर सवाल उठने लगे। मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई थी।
इसके बाद मिले निर्देशों के आधार पर मंदिर से संबंधित हाई पावर कमेटी ने जांच के लिए तीन अधिकारियों की समिति बनाई। समिति की अध्यक्षता विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लक्ष्मी नागप्पन को सौंपी गई, जबकि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार और नगर आयुक्त ओजस्वी राज को भी इसमें शामिल किया गया।
पुलिस टीम गोस्वामी के घर पहुंची
जांच को आगे बढ़ाते हुए वृंदावन के सीओ संदीप सिंह और अपर नगर मजिस्ट्रेट रामप्रसाद त्रिपाठी पुलिस बल के साथ सेवायत गोस्वामी के आवास पर पहुंचे। अधिकारियों ने चांदी के रथ समेत अन्य सामग्री के संबंध में जानकारी मांगी और उन्हें दिखाने के लिए कहा।
गोस्वामी पक्ष ने लिखित आदेश या नोटिस के बिना किसी भी सामग्री को दिखाने से इनकार कर दिया। इसके बाद अधिकारियों को वहां से वापस लौटना पड़ा।
बाद में सीओ वृंदावन और अपर नगर मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी किया गया। इसमें भक्तों से प्राप्त दान से जुड़ी चांदी की वस्तुओं को सुरक्षित रखने और उनके संबंध में दान की रसीद सहित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है।
करीब 200 किलो बताया जा रहा रथ का वजन
सीओ वृंदावन संदीप सिंह के मुताबिक, टीम सेवायत गोस्वामी की गद्दी पर चांदी के रथ से संबंधित जानकारी लेने पहुंची थी। यह वही रथ है जिसे जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान श्री बांके बिहारी महाराज के समक्ष सजाया जाता रहा है।
रथ का कुल वजन करीब 200 किलो बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार, हाई पावर कमेटी के पास शिकायत पहुंची थी कि इस वर्ष रथयात्रा में गोस्वामी पक्ष की ओर से चांदी का रथ नहीं लगाया गया।
जांच के तहत गोस्वामी पक्ष को यह स्पष्ट करना होगा कि चांदी का रथ किसके स्वामित्व में है और वर्तमान समय में वह कहां रखा हुआ है।
जांच समिति की भूमिका पर भी सवाल
मामले को लेकर गोस्वामी समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है। समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी सेवायत गोस्वामी के घर पुलिस अधिकारियों का इस तरह पहुंचना उचित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि इस पूरे मामले पर जल्द आगे की रणनीति तय की जाएगी।
प्रबंधन समिति के सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने भी जांच को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि एक अगस्त को गठित जांच समिति में विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और नगर आयुक्त को शामिल किया गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि वृंदावन के सीओ और अपर नगर मजिस्ट्रेट किस अधिकार के तहत जांच के लिए पहुंचे।
गोस्वामी पक्ष ने बताया रथ का इतिहास
सेवायत ज्ञानेंद्र गोस्वामी ने रथ के स्वामित्व को लेकर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वर्ष 2013 में उनके पिता की ओर से बनाए गए ट्रस्ट को यजमानों ने चांदी का रथ बनवाकर दान किया था।
उनके अनुसार, वर्ष 2013 में पहली बार इस रथ को धार्मिक आयोजन में इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद कई वर्षों तक रथयात्रा और अन्य आयोजनों में इसका प्रयोग होता रहा। हालांकि, बीच में एक-दो वर्षों तक किसी कारण से इसका इस्तेमाल नहीं हो सका।
ज्ञानेंद्र गोस्वामी के मुताबिक, इस वर्ष भी उनकी इच्छा थी कि उनके आराध्य को इसी चांदी के रथ में विराजमान कराया जाए, लेकिन मंदिर परिसर में लगी रेलिंग और हाई पावर कमेटी की ओर से आवश्यक सहयोग नहीं मिलने के कारण रथ नहीं लगाया जा सका।
उन्होंने बताया कि रथ में लगभग 160 किलो चांदी लगी हुई है। इसके अलावा इसमें लकड़ी और दूसरी सामग्री भी लगी है, जिसके चलते इसका कुल वजन काफी अधिक हो जाता है।
गोस्वामी पक्ष का कहना है कि यह रथ उनके ट्रस्ट को यजमानों की ओर से दान किया गया था और इसे मंदिर की संपत्ति मानने का कोई आधार नहीं है। उनका आरोप है कि इस मामले में उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।
फिलहाल चांदी के रथ के स्वामित्व, उसके वर्तमान स्थान और दान से जुड़े दस्तावेजों को लेकर जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में जांच समिति की रिपोर्ट और गोस्वामी पक्ष के दस्तावेजों के आधार पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
