अमेरिका की टैरिफ वसूली पर ट्रंप का बड़ा बयान, अरबों डॉलर की वापसी पर उठे सवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके टैरिफ आदेशों को रद्द किए जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पिछले एक वर्ष में टैरिफ के जरिए जुटाई गई भारी रकम का क्या होगा।

व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “हमने सैकड़ों अरब डॉलर इकट्ठा किए हैं। तो सवाल यह है कि उस पैसे का क्या होगा? इस पर कोई चर्चा ही नहीं हुई।” उन्होंने यह भी कहा कि अदालत कम से कम एक पंक्ति में यह स्पष्ट कर सकती थी कि रकम सरकार के पास रहेगी या वापस की जाएगी।

175 अरब डॉलर पर अटकी नजर

अनुमान है कि 175 अरब डॉलर से अधिक की राशि रिफंड दावों के दायरे में आ सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले में इस बारे में कोई सीधा निर्देश नहीं दिया गया है।

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने कहा है कि यदि अदालत के आदेश के बाद रिफंड देना पड़ा तो ट्रेजरी विभाग तैयार है, लेकिन यह प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक रूप से जटिल हो सकती है।

सेक्शन 122 के तहत नया टैरिफ

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने संघीय कानून के सेक्शन 122 के तहत नया एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन करने की घोषणा की। इसके जरिए 10 फीसदी का ग्लोबल टैरिफ लागू किया जाएगा, जो मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा। ट्रंप ने कहा, “भले ही हमें अदालत में लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़े, लेकिन हम अपनी व्यापार नीति से पीछे नहीं हटेंगे।”

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

जहां डेमोक्रेट नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया, वहीं सीनेट बैंकिंग कमेटी की वरिष्ठ डेमोक्रेट Elizabeth Warren ने कहा कि उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के पास पहले से चुकाए गए टैरिफ की रकम वापस पाने के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा नहीं है।

यह मामला न केवल अमेरिकी व्यापार नीति के भविष्य के लिए अहम है, बल्कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के अधिकारों के संतुलन पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है। आने वाले महीनों में यह मुद्दा कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *