65 लाख रुपये मूल्य के कोडीन कफ सिरप की खरीद-फरोख्त का आरोपी अब पुलिस हिरासत में

Varanasi में कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध खरीद-बिक्री के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले में मास्टरमाइंड बताए जा रहे शुभम जायसवाल के सहयोगी और 65 लाख रुपये की दवा खरीद-फरोख्त के आरोपी सत्येंद्र कुमार साहू को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी Sarnath थाने की पुलिस ने की।

पुलिस के अनुसार, सत्येंद्र साहू Prayagraj के मुट्ठीगंज थाना क्षेत्र का निवासी है और “राजा मेडिकल एंड सर्जिकल एजेंसी” के नाम से फर्म संचालित करता था। उस पर आरोप है कि उसने 40 हजार शीशियां कोडीनयुक्त कफ सिरप खरीदकर आगे सप्लाई की।


40 हजार शीशियों का सौदा, 65 लाख की कीमत

जांच में सामने आया है कि सत्येंद्र ने 40 हजार शीशियां कफ सिरप Shaili Traders से खरीदी थीं। इनकी कुल कीमत करीब 65 लाख रुपये बताई जा रही है। बाद में यह खेप PD Pharma को सप्लाई की गई।

यह तथ्य तब सामने आया जब पीडी फार्मा के संचालक को पहले ही गिरफ्तार कर पूछताछ की गई थी। उसी आधार पर पुलिस ने आगे की कार्रवाई करते हुए सत्येंद्र साहू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।


पूछताछ में हुआ खुलासा

एसीपी सारनाथ विदुष सक्सेना के मुताबिक, 18 दिसंबर 2025 को ड्रग इंस्पेक्टर जुनाब अली की तहरीर पर सारनाथ थाने में कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री और फर्जी फर्म संचालन के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद से लगातार गिरफ्तारी की कार्रवाई जारी है।

सारनाथ थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी ने बताया कि सत्येंद्र साहू, शैली ट्रेडर्स के प्रोपराइटर भोला प्रसाद और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर कफ सिरप के अवैध कारोबार में शामिल था।


अब तक इन पर हो चुकी है कार्रवाई

पुलिस इस मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें शामिल हैं:

  • Vishnu Kumar Pandey

  • Lokesh Agrawal

  • Prateek Gujarati

  • Suresh Chandra Gupta

  • Faizur Rahman

  • Mohammad Saif

इसके अलावा शैली ट्रेडर्स के प्रोपराइटर भोला प्रसाद, कानपुर के विनोद अग्रवाल और अन्य संबंधित व्यक्तियों को भी रिमांड पर लिया जा चुका है।


आगे की जांच जारी

पुलिस अब सत्येंद्र साहू से पूछताछ के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि कोडीनयुक्त दवाओं के अवैध कारोबार पर पूरी तरह शिकंजा कसने के लिए व्यापक जांच की जा रही है।

यह मामला प्रदेश में प्रतिबंधित दवाओं की अवैध सप्लाई और फर्जी फर्मों के जरिए चल रहे नेटवर्क को उजागर करता है, जिस पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है।

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