भगोड़े Nirav Modi को झटका, प्रत्यर्पण के खिलाफ दलील नहीं आई काम

नीरव मोदी प्रत्यर्पण केस में ब्रिटेन के लंदन स्थित हाई कोर्ट (King’s Bench Division) ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की नई याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में उसने भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ केस को दोबारा खोलने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई असाधारण वजह नहीं है, जिसके आधार पर केस को फिर से खोला जा सके।
इस फैसले के बाद नीरव मोदी के कानूनी विकल्प और सीमित हो गए हैं।
CPS और CBI की मजबूत पैरवी
कोर्ट में मामला ब्रिटेन की Crown Prosecution Service (CPS) की ओर से मजबूती से लड़ा गया। इस दौरान भारत की CBI टीम भी लंदन में मौजूद थी और उसने अहम भूमिका निभाई। नीरव मोदी ने अपनी याचिका में दावा किया कि भारत भेजे जाने पर उसके साथ गलत व्यवहार हो सकता है और भारत की ओर से दिए गए आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं। लेकिन CPS और CBI की दलीलों के आगे यह तर्क खारिज कर दिया गया।
2019 से ब्रिटेन की जेल में
नीरव मोदी को 2019 से ब्रिटेन में जेल में रखा गया है। उस पर Punjab National Bank (PNB) के साथ लगभग 6,498 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। ब्रिटेन की अदालतें पहले ही उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे चुकी हैं और उसकी कई अपीलें खारिज हो चुकी हैं।
अगस्त 2025 में दूर हुई बड़ी बाधा
अगस्त 2025 में उसकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया में एक बड़ी बाधा दूर हुई थी। अब इस नई याचिका के खारिज होने के बाद नीरव मोदी के पास कानूनी विकल्प और भी कम हो गए हैं। यह फैसला भारत की सरकार और जांच एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि इससे देश में चल रहे बड़े बैंक घोटाले के मामले में आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
