टकराव तेज: Iran का F-35 पर वार, Donald Trump का बड़ा बयान

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने अब सैन्य और आर्थिक दोनों स्तरों पर नई स्थिति पैदा कर दी है। इसी बीच अमेरिका ने इस संघर्ष से निपटने के लिए बड़ी फंडिंग की मांग की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल किसी भी क्षेत्र में अमेरिकी सेना भेजने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने एक बैठक के दौरान कहा कि यदि वह ऐसा कोई फैसला लेते भी हैं, तो सार्वजनिक रूप से इसकी जानकारी नहीं देंगे, लेकिन अभी ऐसी कोई योजना नहीं है।
दूसरी ओर, ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक F-35 Lightning II लड़ाकू विमान को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फाइटर जेट एक मिशन पर था, तभी उस पर हमला हुआ, जिसके बाद उसे आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। ईरान की ओर से कहा गया है कि विमान को गंभीर नुकसान पहुंचा है और उसके गिरने की संभावना भी जताई गई है, हालांकि इसकी पुष्टि स्पष्ट रूप से नहीं हो पाई है।
इस बीच खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए United Kingdom, France, Germany समेत कई देशों ने संयुक्त बयान जारी किया है। इन देशों ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
वहीं, अमेरिका के रक्षा विभाग Pentagon ने इस बढ़ते संघर्ष के बीच संसद से लगभग 200 अरब डॉलर की फंडिंग की मांग की है। इस राशि का उपयोग सैन्य अभियानों और सहयोगी देशों के समर्थन के लिए किया जा सकता है। हालांकि रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने इस रकम की औपचारिक पुष्टि नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि पर्याप्त संसाधनों के लिए फंडिंग आवश्यक है।
उधर, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान ने अभी तक अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया है। उन्होंने साफ कहा कि यदि ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर फिर से हमला होता है, तो जवाब और अधिक कड़ा और व्यापक होगा।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं और यह संघर्ष वैश्विक स्तर पर आर्थिक और रणनीतिक असर डाल सकता है।
