Kanpur News: कटरी में बाढ़ का खतरा बढ़ा, खेतों में घुसा पानी; नाव से स्कूल पहुंच रहे छात्र

कानपुर में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे कटरी इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं. जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचने के बीच कई गांवों के खेतों में बाढ़ का पानी फैल गया है. इससे सब्जियों की फसल को नुकसान पहुंचने की खबर है.
दिवनीपुर समेत आसपास के गांवों में गंगा का पानी खेतों तक पहुंच चुका है. किसानों की लौकी, भिंडी, धनिया और दूसरी सब्जियों की फसल पानी में डूबने से खराब हो रही है. फिलहाल बाढ़ का पानी गांवों की आबादी तक नहीं पहुंचा है, लेकिन ग्रामीणों को आशंका है कि अगर नदी का जलस्तर और बढ़ा तो हालात मुश्किल हो सकते हैं.
खेतों में पानी भरने से किसानों को नुकसान
दिवनीपुर क्षेत्र में गंगा किनारे खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है. खेतों में पानी भरने से तैयार और खड़ी सब्जियों को नुकसान हुआ है.
किसानों का कहना है कि उन्होंने लौकी, भिंडी, धनिया सहित कई तरह की सब्जियां उगाई थीं. नदी का पानी खेतों में पहुंचने के बाद फसलें डूब गईं और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
ग्रामीण फिलहाल आबादी वाले हिस्से में पानी आने का इंतजार नहीं कर रहे हैं, बल्कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.
बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा असर
गंगा का पानी बढ़ने का असर स्कूली बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई दे रहा है. कटरी क्षेत्र के कई बच्चों को स्कूल जाने के लिए अब नाव का सहारा लेना पड़ रहा है.
दिवनीपुर और आसपास के गांवों से बच्चे नाव के जरिए परमट की ओर जाते हैं. एक तरफ नाव से सफर करने में करीब 30 मिनट लग रहे हैं. इस तरह रोज स्कूल आने-जाने में बच्चों का लगभग एक घंटा केवल नाव की यात्रा में बीत रहा है.
नाव में बच्चों के साथ स्थानीय ग्रामीण भी सफर करते हैं. पानी का बहाव बढ़ने की वजह से यात्रा के दौरान बच्चों में डर भी बना रहता है.
‘डर लगता है, लेकिन पढ़ाई के लिए जाना जरूरी है’
स्कूल से नाव के जरिए लौटने वाले एक छात्र ने बताया कि गंगा का पानी बढ़ने के बाद से रोज नाव से स्कूल जाना पड़ रहा है. उसके मुताबिक, आने-जाने में लगभग एक घंटे का समय नाव में ही निकल जाता है.
छात्र ने बताया कि कुछ बच्चे तैरना जानते हैं, लेकिन सभी ऐसा नहीं कर सकते. कई बच्चे नाव के जरिए ही स्कूल आते-जाते हैं.
पहाड़ीपुर की छात्रा प्रिया ने बताया कि वह परमट स्थित स्कूल में पढ़ती है और पानी बढ़ने के बाद नाव से आना-जाना पड़ रहा है. उसने कहा कि यात्रा के दौरान डर जरूर लगता है, लेकिन पढ़ाई जारी रखने के लिए स्कूल जाना जरूरी है.
स्कूल जाने वाले बच्चों से नहीं लिया जाता किराया
नाव चलाने वाले स्थानीय नाविकों के मुताबिक, स्कूल जाने वाले बच्चों से किराया नहीं लिया जाता. पानी बढ़ने के कारण कुछ स्थानों पर लोगों को आगे जाने के लिए नाव बदलनी पड़ रही है.
नाविकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में बच्चों और ग्रामीणों को नदी पार कराते समय विशेष सावधानी बरती जा रही है. नाव में क्षमता से ज्यादा लोगों को बैठाने से बचने की कोशिश की जा रही है.
जलस्तर और बढ़ा तो बढ़ सकती है परेशानी
अभी गंगा का पानी मुख्य रूप से खेतों तक पहुंचा है और गांवों की आबादी वाले हिस्से अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं. लेकिन आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के बाद नदी का जलस्तर आगे बढ़ने की आशंका बनी हुई है.
अगर गंगा का पानी और ऊपर चढ़ता है, तो कटरी क्षेत्र के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. इससे किसानों की फसलों के साथ-साथ बच्चों की स्कूल यात्रा और ग्रामीणों के दैनिक आवागमन पर भी असर पड़ने की संभावना है.
