फातिमा एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को हाई कोर्ट से राहत, ध्वस्तीकरण पर फिलहाल लगी रोक

तेलंगाना हाई कोर्ट ने ओवैसी परिवार से जुड़े फातिमा एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए संबंधित भवन पर किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले में यथास्थिति (स्टेटस को) बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला बंदलागुडा क्षेत्र में स्थित संस्थान की इमारत से जुड़ा है, जिस पर आरोप है कि वह सलकम चेरुवु झील की फुल टैंक लेवल (FTL) सीमा के भीतर स्थित है। इसी आधार पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई की संभावना जताई गई थी, जिसके खिलाफ संस्थान प्रबंधन ने हाई कोर्ट का रुख किया।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस भूमि और FTL सीमा से संबंधित मामला पहले से ही हाई कोर्ट की एक अन्य पीठ के समक्ष विचाराधीन है। सरकार ने इसी आधार पर याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया।

वहीं संस्थान प्रबंधन ने अदालत को बताया कि भवन को नियमित कराने के लिए बिल्डिंग रेगुलराइजेशन स्कीम (BRS) के तहत आवेदन किया जा चुका है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अंतिम निर्णय आने तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।

यह विवाद सलकम झील क्षेत्र में कथित अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों से जुड़े व्यापक मामलों का हिस्सा है, जिनकी सुनवाई पिछले कुछ समय से हाई कोर्ट में चल रही है। इस दौरान अदालत ने विभिन्न सरकारी विभागों से भवन अनुमति और FTL सीमा निर्धारण से जुड़े रिकॉर्ड पर भी स्पष्ट जानकारी मांगी है।

बताया जा रहा है कि संबंधित शिक्षण संस्थान में बड़ी संख्या में छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, इसलिए मामले का असर हजारों विद्यार्थियों पर भी पड़ सकता है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की गई है। उस दिन अदालत भवन के नियमितीकरण संबंधी आवेदन और अन्य लंबित मामलों की स्थिति को देखते हुए आगे का निर्णय ले सकती है। फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद संस्थान को अस्थायी राहत मिल गई है।

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