विजय की सरकार पर संकट गहराया, तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी हलचल

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर शुक्रवार देर रात बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) प्रमुख विजय को शनिवार सुबह शपथ लेनी थी, लेकिन अंतिम समय में सहयोगी दलों के रुख बदलने से पूरा समीकरण उलझ गया। इसी वजह से राजभवन की ओर से शपथ ग्रहण समारोह की आधिकारिक घोषणा टाल दी गई।
सूत्रों के अनुसार, विजय ने राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर 116 विधायकों के समर्थन वाला पत्र सौंपा, लेकिन सरकार बनाने के लिए अभी भी बहुमत के आंकड़े से दो विधायक कम बताए जा रहे हैं। पहले यह माना जा रहा था कि VCK और IUML ने भी समर्थन दे दिया है, जिससे गठबंधन का आंकड़ा 121 तक पहुंच गया था, लेकिन बाद में IUML ने समर्थन की खबरों से इनकार कर दिया और कहा कि वह DMK के साथ ही रहेगी।
इसी बीच कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों को चेन्नई से बेंगलुरु भेज दिया है, जिससे राज्य की राजनीति और गरमा गई है। बताया जा रहा है कि संभावित टूट-फूट और राजनीतिक दबाव से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया।
राजभवन सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल अब VCK के औपचारिक समर्थन पत्र का इंतजार कर रहे हैं। समर्थन पत्र मिलने के बाद ही शपथ ग्रहण की नई तारीख और समय तय किया जाएगा। वहीं TVK के नेता लगातार VCK प्रमुख थोल. तिरुमावलवन से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं।
विजय की पार्टी को फिलहाल कांग्रेस, CPI और CPI(M) का समर्थन मिला हुआ है। गौरतलब है कि CPI और CPI(M) पहले DMK गठबंधन का हिस्सा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि सरकार गठन को लेकर अंतिम समय तक जोरदार राजनीतिक सौदेबाजी चल रही है।
दूसरी ओर, AMMK महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने TVK नहीं बल्कि AIADMK को समर्थन दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि TVK के पास जो समर्थन पत्र दिखाया गया, वह संदिग्ध हो सकता है। दिनाकरन ने कहा कि उन्होंने अपने विधायक से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो पाई। उन्होंने राज्यपाल से मामले की जांच कराने की मांग भी की है।
तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच अब सबकी नजर VCK के फैसले और राजभवन की अगली घोषणा पर टिकी हुई है।
