ईडी की कार्रवाई से हड़कंप: हजारों टन गेहूं और लाखों रुपये बरामद, 175 ट्रक जब्त

पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से जुड़े एक बड़े घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने व्यापक कार्रवाई करते हुए कई जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान बड़ी मात्रा में गेहूं, नकदी और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

जांच एजेंसी ने 10 अप्रैल को राज्य के विभिन्न इलाकों—कोलकाता, बोंगांव, रानीगंज, मुर्शिदाबाद और हाबरा—में कुल 17 ठिकानों पर मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत तलाशी अभियान चलाया। ये सभी स्थान इस कथित घोटाले से जुड़े कुछ प्रमुख आरोपियों और उनके सहयोगियों से संबंधित बताए गए हैं।

छापेमारी के दौरान करीब 30.9 लाख रुपये नकद, कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए। जांच की शुरुआत एक पुराने मामले के आधार पर हुई, जिसमें कल्याणकारी योजनाओं के तहत गरीबों के लिए निर्धारित पीडीएस गेहूं के बड़े पैमाने पर गबन का आरोप लगाया गया था।

जांच में सामने आया कि सरकारी योजनाओं के लिए आवंटित गेहूं को अवैध तरीके से बाजार में बेचा जा रहा था और कुछ मामलों में इसे सीमा पार निर्यात भी किया गया। इसके लिए आरोपियों ने सरकारी और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के चिह्न वाले बोरों को बदलकर या उलटकर उसकी पहचान छिपाने की कोशिश की।

इस मामले में पुलिस पहले ही कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

ईडी की जांच में एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें आपूर्तिकर्ता, डीलर, ट्रांसपोर्टर और अन्य बिचौलिए शामिल थे। ये सभी मिलकर पीडीएस के गेहूं को कम कीमत पर खरीदते, अलग-अलग जगहों पर जमा करते और फिर उसे वैध स्टॉक दिखाकर खुले बाजार में बेचते या निर्यात करते थे।

कार्रवाई के दौरान करीब 175 ट्रकों में लदा लगभग 5100 मीट्रिक टन गेहूं विभिन्न स्थानों से जब्त किया गया। इसके साथ ही बड़ी संख्या में बिल, चालान और परिवहन से जुड़े दस्तावेज भी मिले, जिनकी जांच में कई गड़बड़ियां सामने आईं। अधिकांश दस्तावेजों में जरूरी जानकारी जैसे सही वाहन नंबर, लाइसेंस विवरण और जीएसटी नंबर तक मौजूद नहीं थे, जिससे इनके फर्जी होने का संदेह और गहरा हो गया है।

तलाशी के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने एक सुनियोजित तरीके से पीडीएस की आपूर्ति श्रृंखला से गेहूं को बाहर निकालकर अवैध चैनलों के जरिए कारोबार किया। इस पूरे नेटवर्क ने सरकारी योजनाओं को नुकसान पहुंचाते हुए अवैध कमाई का बड़ा जरिया बना लिया था।

फिलहाल एजेंसी इस मामले में आगे की जांच कर रही है और इस घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

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